आतंकियों के कट्टरता फैलाने की साजिश हुई बेनकाब… ऐसे बनाते हैं युवाओं को अपना टारगेट

आतंकियों के कट्टरता फैलाने की साजिश हुई बेनकाब... ऐसे बनाते हैं युवाओं को अपना टारगेट


नई दिल्ली. रेडिकलाइजेशन यानि कट्टरता की विचारधारा से युवाओं को प्रभावित करना अब आतंकियों का मजबूत हथियार बन चुका है. आतंकी संगठन अलग-अलग तरीके अपनाकर युवाओं को रेडिकलाइज कर रहे हैं. मंगलुरु धमाके में गिरफ्तार आरोपी शारिक भी बहुत ज्यादा रेडिकलाइज था. पुलिस जांच में ये बात सामने आई है. आतंकी कैसे करते हैं लोगों को रेडिकलाइज, समय के साथ कैसे इसका प्रारूप बदला है और इनसे कैसे सावधान हुआ जाए… न्यूज18 इंडिया ने इस बारे में बात की नेशनल साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट अमित दुबे से, जो कि गृह मंत्रालय की साइबर सुरक्षा कमेटी के सदस्य भी हैं और कई राज्यों की पुलिस को साइबर सिक्योरिटी ट्रेनिंग भी देते हैं.

अमित दुबे ने ऑनलाइन रेडिकलाइजेशन पर देश की अलग-अलग एजेंसियों के लिए अपना प्रेजेंटेशन भी बनाया है, जिसको उन्होंने न्यूज18 इंडिया से साझा किया. उन्होंने कहा, ‘अपना एजेंडा फैलाने के लिए रेडिकलाइजेशन को आतंकी बहुत ही प्रभावी तरीका मानते हैं. पहले सिर्फ वेबसाइट होती थी, लेकिन अब सोशल मीडिया, ब्लॉग, डिस्कार्ड, क्लब हाउस जैसे माध्यम आ गए हैं जिनके जरिए युवाओं को रेडिकलाइज किया जा रहा है. सबसे खास बात ये है कि रेडिकलाइजेशन की पूरी एक प्रक्रिया है जिसका संचालन सिर्फ चुनिन्दा लोग ही विशेष मकसद के लिए करते हैं.’

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सबसे पहले किसी माध्यम से एक ग्रुप  बनाया जाता है और फिर उसमें विचारधारा से जुड़े मेसेज डाले जाते हैं. ज्यादातर ग्रुप के जो हैं उनसे उस विचारधारा को समर्थन दिलाया जाता है, फिर उसी ग्रुप में मौजूद शख्स की सक्रियता देखी जाती है… जैसे ही ये लगता है कि कोई शख्स प्रभावित हो रहा है, तो उसे डार्क वेब में ले जाया जाता है जहां कंटेंट का कोई नियम नहीं होता… खुलेआम विचारधारा के बारे में बातें लिखी जाती हैं और डार्क वेब में एंटर करनेवाले को खास कोड दिया जाता है. इसी तरीके से ट्विटर मेसेज वायरल और उस पर इंप्रेशन क्रिएट करने की आर्टिफिशल कोशिश की जाती है… ये जांच एजेंसियों के लिए बहुत बड़ी चुनौती है.

उन्होंने आगे कहा, ‘इससे युवाओं को सजग रहने की बहुत जरूरत है… सबसे पहली बात है कि जैसे ही कोई जानकारी आए, तो तुरंत उसको वेरिफाई किया जाना चाहिए… किसी भी सोशल मीडिया के अंजाने ग्रुप में नहीं एंटर करना चाहिए… बिना जानें किसी और सर्च इंजन पर नहीं जाना चाहिए… जहां वित्तीय बातें मतलब पैसे की लेनदेन के बारे में कहा जाये, बल्कि इसके बदले तुरंत एलार्म बेल रेज करना चाहिए और सतर्क हो जाना चाहिए.’

Tags: ISIS, Karnataka, PFI



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