इन दवाइयों के इस्तेमाल से पड़ सकते हैं लेने के देने, डॉक्टर ने बताए इनके साइड इफेक्ट


हाइलाइट्स

स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसी तरह की 26 दवाइयों को नेशनल लिस्ट फॉर एशेंशियल मेडिसीन से बाहर कर दिया है
डॉ अतुल कक्कड़ ने बताया कि सेल्फ मेडिकेशन से काफी नुकसान होता है

नई दिल्ली. जब भी हमें गले की कुछ दिक्कत होती है हम मेडिकल स्टोर से एरिथ्रोमाइसिन खरीद लेते हैं और इसका सेवन करने लगते हैं. इससे तुरंत आराम तो मिलता है लेकिन लंबे समय तक इसके कई नकारात्मक असर पड़ते हैं. इसी तरह एसिलॉक, जेनेटेक जैसी गैस की दवाई भी भारत में कुछ लोग धड़ल्ले से बिना डॉक्टरों की सलाह से ले लेते हैं. लेकिन ध्यान रहें कि ऐसी दवाइयों को कभी भी बिना डॉक्टरों की सलाह से नहीं लेनी चाहिए. हाल ही में स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसी तरह की 26 दवाइयों को नेशनल लिस्ट फॉर एसेंशियल मेडिसीन से बाहर कर दिया है. यानी सरकार ने इन 26 दवाओं को जरूरी सूची से बाहर कर दिया है. सर गंगाराम अस्पताल में डिपार्टमेंट ऑफ इंटरनल मेडिसीन के को-चेयरमैन और वरिष्ठ कंस्लटेंट डॉ अतुल कक्कड़ ने बताया कि सेल्फ मेडिकेशन से काफी नुकसान होता है. यही कारण है सरकार ने इन दवाओं को जरूरी सूची से बाहर कर दिया है.

लगातार लेने से कई तरह के नुकसान
डॉ अतुल कक्कड़ ने बताया कि भारत में विचित्र तरह की समस्याएं हैं. यहां लोग खुद से दवाई लेनी शुरू कर देते हैं. उन्होंने बताया कि कोरोना के बाद ऐसा लगा कि लोगों को खुद ही सब कुछ का इलाज करने आता है. इसलिए जरूरी सूची से काफी मेडिसीन हटाई गई हैं. अगर आप एसिडिटी की दवा की बात करें तो अगर इसका लगातार सेवन किया जाए तो इसके कई सारे साइड इफेक्ट हैं. एंटासिड को लेने से तुरंत थोड़ी राहत जरूर मिलती है. यह जल्दी कीटाणुओं को मार देती है लेकिन लंबे समय तक गलत इस्तेमाल करने से इसका कई तरह से नकारात्मक असर भी पड़ता है. हाल ही में हुई कुछ रिसर्च में इस दवा में कैंसरकारक तत्व भी मिले हैं.

इसलिए हटाया जरूरी सूची से
डॉ अतुल कक्कड़ ने बताया कि दरअसल, किसी दवा के रिस्क रेशियो देखा जाता है. यानी किसी दवा का असर कितने दिनों तक क्या पड़ता है. इसके क्या-क्या फायदे हैं और क्या क्या दूरगामी साइड इफेक्ट हैं, इसका आकलन किया जाता है. जिन दवाओं को जरूरी सूची से हटाया गया है कि उन्हें खुद से लगातार लेने पर शरीर पर बुरा असर पड़ता है. विकसित देशों में सिर्फ डॉक्टर ही ऐसी दवाइयों को लेने की सलाह देते हैं लेकिन अपने यहां केमिस्ट की दुकान से लोग धड़ल्ले से इसे ले लेते हैं. यही कारण है कि सरकार ने इन दवाओं को जरूरी सूची से हटा दिया है. डॉ अतुल कक्कड़ कहते हैं कि इन दवाओं को केमिस्ट की दुकान से बिना डॉक्टरों की सलाह से नहीं लेनी चाहिए.

एरिथ्रोमाइसिन के ये हैं साइड इफेक्ट
डॉ अतुल बताते हैं कि एरिथ्रोमाइसिन का इस्तेमाल भारत में अधिकांश लोग गले में खराश के लिए या जुकाम के लिए करते हैं, ये सब वायरल बीमारी होती लेकिन एरिथ्रोमाइसिन बैक्टीरियल इंफेक्शन के लिए एंटीबायोटिक है. इसलिए ऐसी परेशानियों में पहले तो ये दवाई काम ही नहीं करती, दूसरा जब हमें सच में इसकी जरूरत होती है तब ये काम नहीं करेगी क्योंकि उसमें रेजिस्टेंस या प्रतिरोध बन जाता है. इसका सबसे बड़ा साइड इफेक्ट ये है कि इससे पेट खराब हो जाता है. इसी तरह अन्य दवाइयों के भी साइड इफेक्ट हैं.

दवाओं का गलत इस्तेमाल बंद हो
डॉ अतुल बताते हैं कि हमारे पास ओवर द काउंटर मेडिसीन (ओटीसी) है वहीं लेनी चाहिए. बाकी कोई दवाई अपनी मर्जी से नहीं लेनी चाहिए. हालांकि जो दवाई सरकार की जरूरी सूची से हटा दी गई हैं, इसका मतलब यह नहीं कि ये दवाइयां मेडिकल स्टोर में नहीं मिलेंगी. ये दवाइयां मिलती रहेंगी लेकिन इसका गलत इस्तेमाल न हो, इसलिए सिर्फ जब डॉक्टर लिखें तभी इस दवाई को लेनी चाहिए.

Tags: Health, Lifestyle



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