केंद्र का नया अभियान: हिंसा को लेकर ग्रामीण महिलाएं होंगी जागरूक; एक महीने तक मिलेगी हर मदद

केंद्र का नया अभियान: हिंसा को लेकर ग्रामीण महिलाएं होंगी जागरूक; एक महीने तक मिलेगी हर मदद


हाइलाइट्स

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने की नई पहल
महिलाओं को करेगा हिंसा के प्रति जागरूक
महिलाओं को बताए जाएंगे उनके अधिकार

नई दिल्ली. देश में लगातार बढ़ रही लिंग आधारित हिंसा को लेकर केंद्र सरकार ने जागरूकता अभियान शुरू किया है. यह अभियान एक महीने तक चलेगा. इसकी शुरुआत ग्रामीण विकास मंत्रालय ने खासतौर पर ग्रामीण भारत की महिलाओं के खिलाफ हिंसा और उनके अधिकारों को लेकर की है. ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह ने शुक्रवार से इस अभियान की शुरुआत की. उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत देशभर में महिलाओं को हिंसा के मामले में मदद दी जाएगी और उन्हें मजबूत और जागरूक बनाया जाएगा.

इस अभियान से सरकार की कोशिश है कि महिलाओं के खिलाफ हो रही हिंसा के प्रति उन्हें जागरूक किया जाए और मदद भी दी जाए. इस अभियान की शुरुआत के वक्त दिल्ली में देशभर से महिलाओं को बुलाया गया था. कई ने हिंसा को लेकर अपने व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किए. एक महीने के इस अभियान के दौरान महिलाओं को कानूनी जानकारी और उनके सामाजिक-कानूनी अधिकारों की जानकारी दी जाएगी. इतना ही नहीं, उन्हें पुलिस की मदद के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवा भी मुहैया कराई जाएगी. जिला स्तर पर महिलाओं को महिला एवं बाल विकास विभाग भी मदद करेगा.

केंद्रीय मंत्री साध्वी ने सुनाया किस्सा
इस कार्यक्रम में शामिल केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि मैं गांव से आई हूं. आज तक मेरी तरफ किसी की निगाह उठाकर देखने की हिम्मत नहीं हुई.उन्होंने अपना एक अनुभव भी साझा किया. उन्होंने कहा कि जब वो 14 साल की थी तो कंडक्टर ने उन्हें पुश किया, जिसके बाद उन्होंने कंडक्टर को मुंहतोड़ जवाब दिया. साध्वी ने कहा कि महिलाओं में हिंसा के खिलाफ बोलने और लड़ने की हिम्मत होनी चाहिए.

यह कहती है एनसीआरबी की रिपोर्ट
एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2021 में बलात्कार के 31677 मामले सामने आए. 2019-21 के दौरान ग्रामीण भारत में लगभग 32 प्रतिशत विवाहित महिलाएं और देश के बाकी हिस्सों में लगभग 29 प्रतिशत महिलाएं इस तरह की हिंसा से पीड़ित होती हैं. ये क्रम लगातार जारी है. इनमें ग्रामीण भारत में रहने वाली लगभग 77 फीसदी महिलाएं अपने ऊपर हुए हमलों में कोई कानूनी मदद नही मांगती, किसी तरह का केस दर्ज नहीं कराती. देश में ज्यादातर महिलाएं और पुरुष लिंग आधारित हिंसा को सही मानते हैं. जैसे अगर कोई पति बिना इजाजत बाहर जाने या खाना समय पर नहीं बनाने के कारण पत्नी को पीटता है तो, उसे जायज मान लिया जाता है. मंत्रालय के डेटा के अनुसार कोविड काल मे महिलाओं के खिलाफ हिंसा में बढ़ोतरी हुई.

Tags: Domestic violence, National News



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