क्या होती है रिजनरेटिव टेक्नोलॉजी, कैसे इस तकनीक से बढ़ा सकते हैं E-Car की रेंज – regen technology you should also be familiar with the regenerative technology related to electric vehicles – News18 हिंदी


हाइलाइट्स

इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड व्हीकल में रीजेनरेटिव टेक्नोलॉजी देखने को मिलती है.
इसकी मदद से गाड़ी की रेंज को लगभग 15 से 20 किलोमीटर तक बढ़ा सकते हैं.
ब्रेक लगाने के बाद से ही ये टेक्नोलॉजी काम करना शुरु कर देती है.

इलेक्ट्रिक व्हीकल की मांग को देखते हुए वाहन निर्माता कंपनी बहुत जोर शोर से इसका निर्माण कर रही है. भारत सहित दुनिया के कई देशों में लगभग प्रत्येक दिन अलग-अलग कंपनी की इलेक्ट्रिक बाइक और स्कूटर के साथ ही कारें भी लॉन्च होती है. केंद्र और राज्य सरकार इस पर सब्सिडी के रूप में छूट देती है. पेट्रोल और डीजल इंजन के मुकाबले यह पर्यावरण फ्रेंडली है. लेकिन इसे खरीदते समय रेंज को लेकर बहुत सारे लोग चिंतित रहते हैं.

कंपनी भी रेंज को बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है. रीजेनरेटिव टेक्नोलॉजी भी इन्हीं में से एक है. इसकी मदद से गाड़ी की रेंज के लगभग 15 से 20 किलोमीटर आराम से बढ़ा सकते हैं. 

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इलेक्ट्रिक व्हीकल में इस टेक्नोलॉजी की क्यों है जरूरत
मार्केट में बहुत सारे इलेक्ट्रिक और पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियां उपलब्ध हैं. पेट्रोल के मुकाबले इलेक्ट्रिक व्हीकल की कीमत अधिक होती है. इसे खरीदते समय भले ही ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते हैं. लेकिन इसे चलाते समय पेट्रोल पर होने वाले खर्च को बचा सकते हैं. इसकी रेंज को लेकर लोग जरूर सवाल करते हैं. यही वजह है कि कंपनी लगातार गाड़ी की रेंज को बढ़ाने के लिए काम कर रही है. रीजेनरेटिव टेक्नोलॉजी की मदद से गाड़ी की रेंज बढ़ जाती है. इलेक्ट्रिक व्हीकल के लिए ये बहुत जरूरी है.

क्या होती है रीजेनरेटिव टेक्नोलॉजी
इलेक्ट्रिक व्हीकल को चलाने के लिए मोटर की जरूरत पड़ती है. इसी मोटर से ही डायनेमो बैटरी को चार्ज करने का काम करती है. पेट्रोल और डीजल इंजन गाड़ी में बैटरी चार्ज करने के लिए डायनेमो का इस्तेमाल होता है. गाड़ी लगातार चला पाना संभव नहीं है. कई बार बीच में ब्रेक फेल लगानी पड़ती है. गाड़ी रुकते समय मोटर की एनर्जी का इस्तेमाल करें बैटरी को फिर से चार्ज करने की प्रोसेस को रीजेनरेटिव टेक्नोलॉजी कहा गया है. फिलहाल यह केवल हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक व्हीकल में ही उपलब्ध है. 

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कैसे करती है काम
गली में गाड़ी चलाते समय बार-बार ब्रेक लगाने की जरूरत पड़ती है. सिर्फ इतना ही नहीं रेड लाइट पर भी ब्रेक लगाकर इसे रोकते हैं. जिस समय गाड़ी में ब्रेक लगाते हैं उसी समय रीजेनरेटिव टेक्नोलॉजी काम करना शुरू कर देती है. इलेक्ट्रिक व्हीकल बैटरी पर चलती है. इसे चार्ज करने में बहुत समय लगता है. जैसे ही गाड़ी में ब्रेक लगाते हैं उस समय मोटर बैटरी को चार्ज करना शुरू कर देती है. अगर आसान शब्दों में कहे तो गाड़ी रोकते वक्त इसकी बहुत सारी एनर्जी व्यर्थ चली जाती है. रीजेनरेटिव टेक्नोलॉजी उन्हीं एनर्जी का इस्तेमाल कर बैटरी को चार्ज करना शुरू कर देती है.

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