पंजाब: ‘कम्युनिकेशन डेड जोन’ से कैदियों की पहुंच से दूर हो जाएगा मोबाइल नेटवर्क, हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल

पंजाब: 'कम्युनिकेशन डेड जोन' से कैदियों की पहुंच से दूर हो जाएगा मोबाइल नेटवर्क, हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल


एस. सिंह

चंडीगढ़. पंजाब सरकार ने राज्य की विभिन्न जेलों में कम्युनिकेशन डेड जोन बनाने की कवायद शुरू कर दी है. सरकार का दावा है कि इस योजना के बाद जेल में बंद कैदी और गैंगस्टर मोबाइल का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे. सरकार ने यह जानकारी पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में प्रस्तुत एक स्टेटस रिपोर्ट में दी है.

जेल महानिरीक्षक रूप कुमार अरोड़ा के माध्यम से दायर एक हलफनामे में कहा गया है कि नई दिल्ली स्थित एक फर्म द्वारा सेंट्रल जेल बठिंडा में प्रायोगिक तौर पर चार 4-जी जैमर लगाए गए हैं. मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा और न्यायमूर्ति अरुण पल्ली की खंडपीठ द्वारा जारी निर्देशों पर पंजाब सरकार द्वारा हलफनामा दायर किया गया है. हाईकोर्ट पंजाब की जेलों में 4-जी जैमर लगाने के मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई कर रहा है.

बठिंडा में शुरू होगा पहला ‘कम्युनिकेशन डेड जोन’
हलफनामे में हाईकोर्ट को बताया गया कि पंजाब कारागार विभाग केंद्रीय जेल बठिंडा में ‘कम्युनिकेशन डेड जोन’ की अवधारणा को लागू करने पर भी सक्रिय रूप से विचार कर रहा है, जहां पर खतरनाक गैंगस्टर और कैदी रह रहे हैं. पंजाब कारागार विभाग केंद्रीय जेल बठिंडा और इसके आसपास के क्षेत्रों को ‘कम्युनिकेशन डेड जोन’ घोषित करने के लिए सक्रिय रूप से दूरसंचार विभाग (डीओटी) भारत सरकार से आवश्यक मंजूरी लेने का विचार कर रहा है. इसके बाद किसी भी टेलीकॉम ऑपरेटर को जेल में सिग्नल भेजने की अनुमति नहीं दी जाएगी. हाईकोर्ट को यह बताया गया है कि ‘कम्युनिकेशन डेड जोन’ की अवधारणा को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए पंजाब कारागार विभाग द्वारा कई आवश्यक उपाय पहले ही किए जा चुके हैं.

जैमर की खरीद को मंजूरी
11 सदस्यीय तकनीकी मूल्यांकन समिति (टीईसी) की पहली बैठक बीते माह 6 अक्टूबर को हुई थी और बैठक में टीईसी के सदस्यों ने फैसला किया कि पंजाब कारागार विभाग को केवल एक स्रोत से जैमर की खरीद व स्थापना करनी चाहिए. इस फैसले को सरकार से मंजूरी भी मिल गई है. अगली बैठक में टीईसी के सदस्यों द्वारा मैसर्स बीईएल और मैसर्स ईसीआईएल के तकनीकी विशेषज्ञों के साथ चर्चा की जाएगी.

3 जेलों में टी-एचसीबीएस पायलट प्रोजेक्ट
हलफनामे के माध्यम से उच्च न्यायालय को यह भी बताया गया कि पंजाब कारागार विभाग ने राज्य की 13 जेलों में टी-एचसीबीएस के पायलट प्रोजेक्ट के संबंध में डीओटी के संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय और बैठक की है और पायलट प्रोजेक्ट जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है. पिछली सुनवाई के दौरान पंजाब के एडवोकेट जनरल ने जेलों में आवश्यक सुरक्षा उपायों को लागू करने के लिए समय विशेष योजना का पता लगाने और अदालत के समक्ष पेश करने के लिए समय मांगा था. हलफनामे में कहा गया है कि जेल विभाग द्वारा गठित पंजाब सरकार की तकनीकी मूल्यांकन समिति (टीईसी) ने प्रस्ताव दिया है कि पंजाब की जेलों में लगाए जाने वाले जैमरों में 5-जी और उससे ऊपर के संकेतों को अवरुद्ध करने के लिए अपग्रेड करने योग्य विशेषताएं होनी चाहिए.

Tags: Crime News, Punjab high court, Punjab news



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