महाराजा हरि सिंह की जयंती पर कल रहेगी छुट्टी, जम्‍मू कश्‍मीर को केंद्र सरकार का तोहफा

महाराजा हरि सिंह की जयंती पर कल रहेगी छुट्टी, जम्‍मू कश्‍मीर को केंद्र सरकार का तोहफा


हाइलाइट्स

महाराजा हरि सिंह की जयंती पर कल रहेगा अवकाश
केंद्र सरकार ने मानी बरसों पुरानी मांग, लोगों में खुशी
रैली निकाल कर मनाया जाएगा महाराजा का जन्‍मदिन

जम्‍मू. जम्मू कश्‍मीर (Jammu Kashmir) के अंतिम डोगरा शासक महाराजा हरि सिंह की कल यानि 23 सितंबर को जयंती है. केंद्र सरकार (Central Government)  व उपराज्यपाल प्रशासन ने महाराजा के जन्मदिन पर सार्वजनिक अवकाश की मांग को स्वीकारते हुए छुट्टी का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. अब कल जम्मू कश्‍मीर में अवकाश होगा. महाराजा हरि सिंह ने पाकिस्तान के आगे झुके बिना भारत के साथ रियासत जम्मू व कश्‍मीर का विलय किया था और इस योगदान को पूरा देश स्वीकारता है. अब महाराजा की 123वीं जयंती पर जम्मू कश्‍मीर में सरकारी अवकाश होगा.

केंद्र सरकार के इस फैसले से जम्मू कश्‍मीर में जश्न का माहौल बना हुआ है. लोग रैलियां निकाल कर इस दिन को मनाने की तैयारियां कर रहे हैं. दरअसल, 1961 में महाराजा के निधन के बाद से ही लोग अवकाश की मांग करते आए हैं. इसके लिए कई बार आंदोलन भी हुए लेकिन कश्‍मीर केंद्रित पार्टियों का हमेशा जम्मू-कश्‍मीर की सियासत में दबदबा रहा और इस मांग को नहीं माना गया. महाराजा हरि सिंह की जयंती की छुट्टी को लेकर युवा राजपूत सभा, डोगरा स्वभिमान संगठन, ब्राह्मण सभा व अन्य दल काफी समय से धरना प्रदशन करते आ रहे थे और हाल ही में भाजपा नेताओं ने इन संगठनों से मिलकर इस मांग को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के पास उठाया था और फिर केंद्र सरकार के आदेश के बाद ये घोषणा कर दी गई.

दूरदर्शी, प्रगतिशील व सुधारवादी माने जाते हैं महाराजा हरि सिंह 

प्रशासनिक सुधारों के न्यायप्रिय शासक रहे महाराजा हरि सिंह ने महिला सशक्तीकरण, दलितों के उत्थान व छुआ-छूत को खत्म करने में अहम योगदान रहा है. भारत के साथ राज्य के विलय के बाद एक साजिश के तहत उनके योगदान को नकारा गया. इसके खिलाफ अलगाववाद की जननी ताकतों ने उन्हें हर स्तर पर नकारने का प्रयास किया. कश्‍मीर में उन्हें खलनायक की तरह पेश करने का प्रयास भी किया गया. जबकि महाराजा, अपने समय में सबसे ज्यादा दूरदर्शी, प्रगतिशील व सुधारवादी माने जाते हैं. उनकी ये खूबियां उनके विरोधी भी मानते आए हैं.

पाकिस्तान के दबाव के आगे झुके नहीं थे महाराजा 

महाराजा हरि सिंह के पोते युवराज विक्रमादित्य सिंह ने न्यूज 18 को बताया कि किसी को ये इतिहास कभी नहीं भूलना चाहिए कि महाराजा ने अवाम के लिए क्या-क्या कदम उठाए थे. वे पाकिस्तान के दबाव के आगे झुके नहीं और भारत के साथ अपनी रियासत का विलय किया. यही नहीं महाराजा ने 1930 में लंदन में ब्रिटिश सरकार की ओर से आयोजित गोलमेज सम्मलेन में कहा था कि ऑल इंडिया फेडरेशन बनने पर उसमें शामिल होने वाली जम्मू कश्‍मीर पहली रियासत होगी. इसके साथ ही इंग्लैंड के तत्‍कालीन राजा जार्ज पंचम के सामने ब्रिटिश राष्ट्रमंडल में भारतीयों को समान नागरिक अधिकारों पर जोर दिया था. महाराजा ने दलित समाज के उत्थान के लिए कई कदम उठाए छुआछूत को खत्म किया. युवराज ने कहा कि हम पीएम मोदी, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का धन्यवाद करते हैं.

Tags: Central government, Jammu kashmir



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