म्यांमार: भारतीयों को ‘बंधक’ बनाने पर विदेश मंत्रालय का एक्शन, रैकेट में शामिल 4 फर्मों की पहचान

म्यांमार: भारतीयों को 'बंधक' बनाने पर विदेश मंत्रालय का एक्शन, रैकेट में शामिल 4 फर्मों की पहचान


हाइलाइट्स

ऐसा माना जा रहा है कि कम से कम 500 भारतीय म्यांमार में फंसे हुए हैं.
अब तक 4 फर्मों को इन नौकरियों की पेशकश करने वाली कंपनियों के रूप में पहचाना गया है.
कई बार लोगों ने नतीजों के बारे में चेतावनी दिए जाने के बावजूद इन नौकरियों को किया.

हैदराबाद. विदेश मंत्रालय ने म्यांमार में भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स को नौकरी के जाल में फंसाने के रैकेट में शामिल 4 कंपनियों की पहचान की है. बताया जा रहा है कि लगभग 100 से 150 भारतीय अभी भी वहां फंसे हुए हैं. विदेश मंत्रालय भारतीयों को बचाने के लिए काम कर रहा है और अब तक अधिकारी 32 लोगों को बचाने में कामयाब रहे हैं. हालांकि, हैदराबाद और दिल्ली के लोग जो लौटने में कामयाब रहे हैं, उन्होंने बताया कि ऐसा माना जाता है कि कम से कम 500 भारतीय वहां फंसे हुए हैं. हर दिन कम से कम 10-20 भारतीयों को म्यावाडी (Myawaddy) और माई सॉट (Mae Sot) लाया जाता है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के मुताबिक ऑफिस ऑफ द प्रोटेक्टर ऑफ इमिग्रेंट्स (पीओई-हैदराबाद) के एक बयान में कहा गया है कि अब तक ओकेएक्स प्लस (दुबई स्थित), लाजादा, सुपर एनर्जी ग्रुप और जेनटियन ग्रुप को इन नौकरियों की पेशकश करने वाली कंपनियों के रूप में पहचाना गया है. इन नौकरियों में फंसे भारतीय आईटी पेशेवरों को ऑनलाइन चीनी महिलाओं के रूप में पेश किया गया और क्रिप्टो मुद्रा में निवेश के नाम पर अमेरिका और यूरोप के अमीर लोगों को धोखा दिया गया.

कई आईटी कंपनियां कर्मचारियों को बंधक बनाकर रखने के रैकेट के मुख्य केंद्र म्यावाडी से चलती हैं. जो आईटी एसईजेड क्षेत्र माई सॉट से ज्यादा दूर नहीं है. कहा जाता है कि थाईलैंड-म्यांमार सीमा पर स्थित म्यावाडी में इस धंधे को बड़े पैमाने पर चीनी नागरिक कंट्रोल करते हैं. वहां फंसे मुंबई के एक आईटी पेशेवर ने कहा कि ‘अगर हमें जिंदा बाहर आना है तो भारत सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए. पीओई कार्यालय ने कहा कि नौकरी चाहने वाले वीजा-ऑन-अराइवल सुविधा का उपयोग करके बैंकॉक पहुंचते हैं और जल्दी से म्यांमार में भेज दिए जाते हैं. इसलिए उनके आने और आगे की आवाजाही पर नजर रखना तब तक संभव नहीं है, जब तक पीड़ितों या उनके रिश्तेदार मिशन से संपर्क नहीं करते हैं.

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गौरतलब है कि इस तरह का पहला मामला जुलाई 2022 में दर्ज किया गया था. तब से विदेश मंत्रालय थाईलैंड और म्यांमार में अपने मिशनों के माध्यम से ऐसे भारतीय नागरिकों को बचाने के लिए जरूरी कार्रवाई कर रहा है. यांगून और बैंकॉक में भारतीय दूतावासों ने एडवायजरी जारी की है और नियमित रूप से स्थानीय अधिकारियों के साथ इस तरह के मामलों को उठाते रहते हैं. पीओई ने कहा कि कई बार लोगों ने नतीजों के बारे में चेतावनी दिए जाने के बावजूद इन नौकरियों को किया. यह भी देखने में आया है कि कुछ भारतीय खुद इन नौकरियों के स्कैंडल में शामिल हैं. वे दूसरे भारतीयों को लालच देने के लिए अच्छी रकम हासिल कर रहे हैं.

Tags: India, MEA, Ministry of External Affairs, Myanmar



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