विधानसभा उपचुनाव: इस चक्रव्यूह जो भेद लेगा वही फतह करेगा कुढ़नी का किला!

विधानसभा उपचुनाव: इस चक्रव्यूह जो भेद लेगा वही फतह करेगा कुढ़नी का किला!


हाइलाइट्स

जाति के चक्रव्यूह में फंस गया कुढ़नी विधान सभा का उपचुनाव.
जदयू-भाजपा के बीच मुख्य मुकाबला,मगर और भी हैं कई कोण.
VIP, AIMIM और निर्दलीयों ने बढ़ा दी है जदयू-भाजपा की टेंशन!

पटना/मुजफ्फरपुर. कुढ़नी विधान सभा उप चुनाव में मुकाबला बेहद दिलचस्प और कांटे का माना जा रहा है. शुरुआत में तो मुकाबला बीजेपी उम्मीदवार और महागठबंधन उम्मीदवार के बीच माना जा रहा था. लेकिन, जैसे ही चुनावी संघर्ष में कुछ और राजनीतिक पार्टियों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने ताल ठोका लड़ाई दिलचस्प हो गयी है. बाजी कौन मारेगा? यह आज पूरे दावे से कोई नहीं कर सकता है. दरअसल, कुछ उम्मीदवार ऐसे हैं जो खेल को बिगाड़ने का पूरा माद्दा रखते हैं.

कुढ़नी से महागठबंधन ने जदयू उम्मीदवार के तौर पर मनोज कुशवाहा को उतारा है, जो कुशवाहा जाति से आते हैं. फिलहाल इस जाति के वोटरों का झुकाव जदयू उम्मीदवार की तरफ दिख रहा है. लेकिन, बीजेपी भी इस वोट बैंक पर तगड़ा दावा कर रही है और इसी जाति के अपने कद्दावर नेता सम्राट चौधरी को इस वोट बैंक को अपने पाले में करने के लिए बड़ी जिम्मेदारी दे दी है. वहीं कुछ ऐसा ही हाल बीजेपी उम्मीदवार केदार गुप्ता के साथ भी है जो वैश्य जाति से आते हैं. इस वोट बैंक पर बीजेपी की मजबूत पकड़ दिखाई पड़ रही है, ये तो साफ -साफ समीकरण दिख रहा है.

किसका खेल बनेगा और किसका बिगड़ेगा?
भाजपा और जदयू के मुकाबले के बीच जिन जातियों की जीत-हार में महत्वपूर्ण भूमिका है, उनमें जो उम्मीदवार उतरे हैं वो खेल बनाने और बिगाड़ने में लगे हुए हैं. यहीं दिलचस्प हो गया है. विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी अपनी जाति (निषाद-मल्लाह जाति) के वोटर पर बड़ा दावा कर रहे हैं. वे कहते हैं कि सहनी और भूमिहार वोटर का एकमुश्त वोट मिलेगा और जीत हमारी होगी. वहीं बीजेपी भी अपने पार्टी के तमाम सहनी नेताओं को इस फ्रंट पर उतरने की तैयारी कर चुकी है. सहनी वोटर बीजेपी का कोर वोटर माना जाता है.

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सहनी Vs सहनी के मुकाबले में वोटों का बंटवारा!
वहीं, पिछली बार सहनी उम्मीदवार के तौर पर अनिल सहनी राजद के टिकट पर चुनाव जीते थे. हालांकि, एक मामले में उनकी सदस्यता चली गई तो उनकी जगह जदयू उम्मीदवार के तौर पर मनोज कुशवाहा को टिकट दे दिया गया जिससे अनिल सहनी नाराज बताए जा रहे हैं. लेकिन, बताया जा रहा है कि उन्हें तेजस्वी यादव ने मना लिया है. मगर अंदर ही अंदर उनके समर्थक क्या करते हैं, ये चुनाव परिणाम के बाद ही पता चल पाएगा. राजद के लिए समस्या युवा राजद के पूर्व जिला अध्यक्ष और जिला पार्षद शेखर सहनी भी हैं. उन्होंने राजद से इस्तीफा दे दिया और निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनावी मैदान में कूद चुके हैं. कहा जा रहा है कि ये मुकेश सहनी के साथ-साथ राजद के उम्मीदवार को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं.

भूमिहार वोटरों पर वीआईपी, भाजपा, जदयू की नजर!
मुकेश सहनी की वीआईपी पार्टी ने नीलाभ कुमार को उम्मीदवार बनाया है जो भूमिहार जाति से आते हैं और कुढ़नी विधान सभा में भूमिहार जाति में इनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है. ये बीजेपी और जदयू दोनों का खेल बिगाड़ रहे हैं. दरअसल, अभी तक भूमिहार वोटर बीजेपी के कोर वोटर माने जाते रहे हैं, लेकिन मोकामा में इसमें बंटवारा हो गया. वहीं इसके पहले बोचहां में हुए उपचुनाव में भी भूमिहार वोटर ने बीजेपी के खिलाफ अपनी नाराजगी दिखा चुके हैं जिसका घाटा बीजेपी को उठाना पड़ गया था.

जदयू के ललन सिंह भी कूदेंगे कुढ़नी उपचुनाव के मैदान में
जानकारों की मानें तो इस बार भी भूमिहार वोटों में बंटवारा तय दिख रहा है, क्योंकि मुकेश सहनी ने भूमिहार उम्मीदवार उतारकर दोनों के लिए मामला फंसा दिया है. लेकिन, खबर है कि जदयू के राष्ट्रीय प्रेसिडेंट ललन सिंह कुढ़नी में कैंप करने वाले हैं और भूमिहार वोटरों को जदयू के पाले में करने के लिए पूरी ताकत लगाएंगे. वहीं, बीजेपी ने भी पूर्व मंत्री सुरेश शर्मा को भूमिहार वोटरों को अपने पाले में करने के लिए जिम्मेदारी दी है.

कुढ़नी उपचुनाव में सियासी समीकरणों का क्या निकल रहा सार?
वहीं, कुढ़नी में महागठबंधन के कोर वोटर मुस्लिम वोटर में भी सेंध लगाने के लिए AIMIM ने अपने उम्मीदवार गुलाम मुर्तजा अंसारी को उतारकर मुकाबला दिलचस्प बना दिया है. यह इसलिए कि गोपालगंज उपचुनाव में मुस्लिम वोटरों का अच्छा खासा वोट MIM को मिला था और महागठबंधन उम्मीदवार को हराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. इस बार भी MIM उम्मीदवार उतरने से महागठबंधन के लिए चुनौती बढ़ गयी है और इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिलता दिख रहा है.

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